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ब्रह्म मेघ

                
                                                         
                            पानी बरसे बादल से
                                                                 
                            
किरनें निकले बादल से
सारे रंग हैं बादल से
जीवन अंकुर बादल से

जब जब देखूं बादल को,मुझे स्वयं का रूप लगे !
जब जब सुनता गरजन को,मेघों का संगीत लगे !

छाया देता जगत को यह,जैसे विश्व वृक्ष खड़ा!
इसके मुलायम मेघ मुझे ,श्वेत सुनहरे पत्र लगे !

मेरे मन को यह ऋतु बुँदें ,पत्रो से टपकी ओस लगे !
मेघो की ये चाल मुझे, विश्वभाव व्योम लगे!

ब्रह्म मेघ तू बोल रहा है,
स्वप्न नींद की खोल रहा है,
मुझमें मुुझसे मुुझ तक,
चेतन स्व को हिलोर रहा है,
तेरे छाया की गोद में बैठा,
वह नारायण मौन की भाषा बोल रहा है!
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5 महीने पहले

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