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स्वाभिमान हमारा

                
                                                         
                            सनातन की पदपाठी का, अभिमान हमारा आला है।
                                                                 
                            
राणा के हाथों में दिखता, सौ सामन का भाला है।
सनातन की पदपाठी का, अभिमान हमारा आला है।
राणा के हाथों में दिखता, सौ सामन का भाला है।

यह उस वीर पद्मावती की धरती है, यह माता अहिल्याबाई होलकर की धरती है।
जिन्होंने इस धरा के खातिर, अपने प्राण गवाए हैं।
ये उस तेजबहादुर की धरती है, जिसने माता के चरणों में अपने शीश काट चढ़ाए हैं।

माता भारती की कृपा से, नमन आज मैं करता हूं।
उस माता के लाल रंग को, गाढ़ा लाल मैं करता हूं।
उस रक्त रंजित धरा को, नमन आज मैं करता हूं।
आओ मां भारती के लालों, तुम्हें अभिनंदन करता हूं।

जय हो माता भारती, कृपा करो, मैं वीरों का अभिमान कहूं। जय मां भारती, कृपा करो, मैं राणा का स्वाभिमान कहूं।
जय मां भारती, कृपा करो, मैं शिवाजी के ये वीर गान कहूं।
जय मां भारती, कृपा करो, मैं राणा का अभिमान कहूं।

जय हो माता भारती के, लाल अभिमान तुम्हारा है।
जय हो माता भारती के, अभिमान तुम्हारा आला है।
इस धरा के, इस धरा के, इस धरा के तुम...
इस धरा के तुम अमिट, सितारे हो गए हो।
तुम इस मां भारती के, लाल प्यारे हो गए हो।
-अंश कुमार साहू
- हम उम्मीद करते हैं कि यह पाठक की स्वरचित रचना है। अपनी रचना भेजने के लिए यहां क्लिक करें।
10 महीने पहले

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