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सोचते हो क्या।

                
                                                         
                            बुलाए बिन बुलाए आ गए हो तो पूछते हो क्या।।
                                                                 
                            
जब आ ही गए हो तो आ जाओ सोचते हो क्या।।
हुआ था इश्क़ जब तुमको तब ये सोचना था यार,,
जब हो ही गया है प्यार तो अब सोचते हो क्या।।
दुआ तो यही थी के किसी से बदले ना यहाँ कुछ,,
अगर बदल ही गया है दिल तो सोचते हो क्या।।
पुराने ख़्वाब जब भी याद आयेंगे तो तुम रो दोगे,,
नींद से जग ही गए हो अगर तो सोचते हो क्या।।
रोज़ की तरह गर हर दिन ही गुज़र जाना है तय,,
इस उदासी के दरिया को बहने दो रोकते हो क्या।
हंसी लब पे रखो बस तुम दिल का हाल कैसा हो,,
ये दुनियाँ देखती है सब इसलिए सोचते हो क्या।।
चलो अच्छा हुआ जो हो गया सो गया अब देव,,
बुला लो दर्द ओ ग़म को तुम अब सोचते हो क्या।।
-सुनील देव
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एक घंटा पहले

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