आप अपनी कविता सिर्फ अमर उजाला एप के माध्यम से ही भेज सकते हैं

बेहतर अनुभव के लिए एप का उपयोग करें

विज्ञापन

रोक टोक ये टोकाटाकी अच्छी है पर ठीक नहीं।।

                
                                                         
                            रोक टोक ये टोकाटाकी अच्छी है पर ठीक नहीं।।
                                                                 
                            
अपनो से ये पीटा पाटी अच्छी है पर ठीक नहीं।।

किसने तुमको हक़ है दिया अपनी मर्ज़ी से जीना,,
सर पे जूती पाँव में टोपी अच्छी है पर ठीक नहीं।।

हाड़मास के पुतले है तो दुख तकलीफ़ तो होगी ही
बात बात पे पटका पटकी अच्छी है पर ठीक नहीं।

आँख समंदर पाँव में सहरा और होठों पे प्यास जवाँ
चीज़ें है सब चलती फिरती अच्छी है पर ठीक नहीं।।

बड़े बुज़ुर्गों का होना जब कोई नहीं चाहता है तो,,
घर आँगन में अब इक बेटी अच्छी है पर ठीक नहीं।।

किसको क्या समझाएं यां कौन सुने हैं अपनी अब
हर इक बात पे खींचाखांची अच्छी है पर ठीक नहीं।

रावण भी मिल जाएंगे तुम राम तो बनके देखो देव,,
चेहरे की ये लटका लटकी अच्छी है पर ठीक नहीं।।
-सुनील देव
- हम उम्मीद करते हैं कि यह पाठक की स्वरचित रचना है। अपनी रचना भेजने के लिए यहां क्लिक करें।
8 घंटे पहले

कमेंट

कमेंट X

😊अति सुंदर 😎बहुत खूब 👌अति उत्तम भाव 👍बहुत बढ़िया.. 🤩लाजवाब 🤩बेहतरीन 🙌क्या खूब कहा 😔बहुत मार्मिक 😀वाह! वाह! क्या बात है! 🤗शानदार 👌गजब 🙏छा गये आप 👏तालियां ✌शाबाश 😍जबरदस्त
विज्ञापन
X
बेहतर अनुभव के लिए
4.3
ब्राउज़र में ही

अब मिलेगी लेटेस्ट, ट्रेंडिंग और ब्रेकिंग न्यूज
आपके व्हाट्सएप पर