हर सफर का मुकाम एक मंजिल हो
ये जरूरी तो नहीं
कश्तियों का साथी समंदर हो
ये जरूरी तो नहीं
राह तो भूल जाते है राहगीर भी
चलते चलते तो थक जाते है मुसाफिर भी
वो थके यूं ही बैठे रह जाएं
ये जरूरी तो नहीं
जीवन संघर्षों से भरी एक किताब
ये किताब कभी खत्म ही ना हो
ये जरूरी तो नहीं
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