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जवाब पे उठता ये सवाल

                
                                                         
                            क्यू मानू मै की ये रात है
                                                                 
                            
क्यू मानू दिन ढले तो शाम है
मेरी हर जवाब पे उठता ये सवाल क्यू है
सितारों को रौशनी की तलाश क्यू है
चांद खफा है खुद से
उसमें इतने दाग क्यों है
क्यू मानू मै चांद बेदाग है
गांव की गलियों में ये शहरों की धूल क्यों है
पहले तो पेड़ थे यहां ये रेत क्यों है
लकड़ी की खिड़की सीसे के दरवाजे में बंद क्यों है
क्यू मानू मै सूरज में तेज कम है
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9 घंटे पहले

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