इंसान नहीं वह तो पूरी किताब थे,
वह मिसाईलमैन, बेमिसाल थे।
देश के सच्चे नागरिक थे,
वह तो D.R. कलाम थे।
चिड़िया को देख चाहा था उड्ना आकाश में,
पर वह तो आर-पार हो गए आकाश के ।'
चमकना था उन्हें एक आईने की तरह,
चमक गए वह तो सूरज की तरह ।
सच में वह कलाम कमाल थे ।
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