इश्क़ में धोखा

ISHQ MEY DHOKA
                
                                                             
                            इश्क़ में धोखा खाया हूं दहल उठी दिल कि दीवारें,
                                                                     
                            
दावा करूं या तड़पता ख़ुद को मैं छोड़ दूँ...

कितनी मिन्नतें, कितनी आरज़ूं , कितनी जुस्तजूं, मैं करूँ,
इंसान ही तो हूं, जान दूँ या जाने दूँ बता क्या मैं करूँ 

लेकर ग़मों का बोझ नंगे पांव चल रहा हूं मैं,
मोड़ दूं या राह तेरी मैं छोड़ दूँ...

तरसती हैं नज़रें हर पल याद में तेरी,
राहों को छोड़ूं, या ताकना राह को छोड़ दूँ....

एहसास है मुझे हर एक पल, हर एक लफ़्ज़ का जो तुझसे मिला,
भुला दूँ सब, या मैं एहसास करना छोड़ दूँ...

साँसो में बहता तू पल-पल है मेरे,
रिस-रिस के लूँ, या मैं साँस लेना छोड़ दूँ...

मरना न था जीना था मुझे सदा संग तेरे,
भूल गई है तू, क्या मैं भी जज़्बातों को तोड़ दूँ...

चल मान लिया हमने ग़लती हमारी होगी,
तो फिर क्यूँ , क्यूँ तू बचता है नज़रें मिलाने से,
तुझसे ना पूछूँ,
पल पल मरता मैं रहूँ,
क्या सब कुछ दिल में दबा ही मैं छोड़ दूँ.....

ग़ैरों की बातों पे, यक़ीन तूने पल में किया,
अपना कभी ना समझा, धोखा तूने दिया,
दिखावा था सब, मतलब का साथ रहा,
कुछ ना पूछूँ, तरह तेरी मैं भी मुँह मोड़ दूँ...

कोशिश तूने भी कभी कुछ तो की होती,
कुछ मैं करूँ या अब सब रब पे छोड़ दूँ...

अब तू ही बता, क्या मैं करूँ

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3 years ago

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