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प्रकृति का खेल निराला

                
                                                         
                            यह प्रकृति का खेल बड़ा ही निराला,
                                                                 
                            
तपती धरती को दे तृप्ति की जलधारा।
काले मेघों की गर्जन, सृष्टि का नव-सृजन,
नन्हे बीजों में भर दे जीवन का स्पंदन।
इस जग के जीव-जगत को सराबोर कर दे,
यह अमृत-सी धारा,
यह प्रकृति का खेल बड़ा ही निराला।
बारिश थमी, शीतलता आई,
धरती को मोतियों के श्रृंगार से सजाई।
नन्हीं चिड़ियों का मधुर कलरव,
नन्हे पौधों में रंगीन यौवन आया।
पुष्पित फूलों की सुंदर छटा,
झूमते भँवरों की मदमस्त अदा।
नए-नए रंगों में यह दुनिया रंगीन नज़र आई,
नव-सृजन का संदेश प्रकृति ने हमें सिखाया।
— रुपेश साहू 
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48 minutes ago

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