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जीवन दर्शन

                
                                                         
                            तू नीर है इस जग की,
                                                                 
                            
तू पीर है, तू जीवन की तस्वीर है।
तेरा यह गुण जन-मानस की तकदीर है।
तेरा यह निरंतर बहने का गुण
हिम्मत देता है उन परिंदों को,
जो सोचकर बैठे हैं आसमानों में
कि यही उनकी तकदीर है।
पथरीली राहों से चलकर
मंज़िल बढ़ती जाती है।
यह संदेश उन नौजवानों को,
जो सोचकर बैठे हैं आशियानों में
कि यही तकदीर है रब के ख़ज़ाने की।
मन में मेहनत से मंज़िल तक जाने की
ललक जगाई है।
ऐ नीर! तेरा यह गुण
सबके मन को भाई है।
कितना भी जलता रहे यह जग,
तूने हरदम प्रीत निभाई है।
सुंदर सृष्टि, अभिनव धरा की,
अपने अमृत से प्यास बुझाई है।
ऐसा गुण हमें भी दे दो,
अब न कर प्रीत पराई रे।
तू नीर, तू धीर, तू इस जीवन की
तस्वीर हमें दिखाई है।
 
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48 minutes ago

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