आप अपनी कविता सिर्फ अमर उजाला एप के माध्यम से ही भेज सकते हैं

बेहतर अनुभव के लिए एप का उपयोग करें

विज्ञापन

गीत:- मेरी प्यारी बावरी

                
                                                         
                            चंचल चितवन, भोली बातें, उसकी यही कहानी है,
                                                                 
                            
मेरी हर एक सांस पे देखो, उसकी ही निगरानी है।
दुनिया समझे पागल उसको, जग से वो अनजानी है,
वो कोई ख्वाब नहीं है मेरा, वो तो मेरी बावरी है।

कभी-कभी वो बिना बात ही, रूठ के मुखड़ा मोड़ेगी,
हंस देगी तो सारे जग के, बंधनों को वो तोड़ेगी।
उसकी बातें जैसे कोई, बहती हुई नदी का पानी,
हर पल लगती नई-नई सी, सदियों पुरानी वो कहानी।
उसकी सादगी पर ही देखो, मेरी दुनिया हारी है,
वो कोई ख्वाब नहीं है मेरा, वो तो मेरी बावरी है।

भीड़ में जग की मेरा दामन, कस कर वो थाम लेती है,
मुझसे पहले धड़कन मेरी, बस उसका ही नाम लेती है।
उसके हँसने से खिलती है, मेरे आंगन की हर कली,
वो ना हो तो सूनी लगती, इस शहर की हर एक गली।
उसकी हर एक नादानी भी, मुझको लगती प्यारी है,
वो कोई ख्वाब नहीं है मेरा, वो तो मेरी बावरी है।

काजल वाली आँखें उसकी, जैसे कोई गहरी झील,
उसे मनाना लगता जैसे, कोई मुश्किल बड़ी दलील।
पर जब वो बाहें फैलाकर, सीने से लग जाती है,
सारे जग की खुशियाँ मानो, पल भर में मिल जाती हैं।
मेरी ज़िन्दगी की किताब का, वो ही पन्ना भारी है,
वो कोई ख्वाब नहीं है मेरा, वो तो मेरी बावरी है।
— रोहित शर्मा भारद्वाज 'नादिर'
- हम उम्मीद करते हैं कि यह पाठक की स्वरचित रचना है। अपनी रचना भेजने के लिए यहां क्लिक करें।
एक घंटा पहले

कमेंट

कमेंट X

😊अति सुंदर 😎बहुत खूब 👌अति उत्तम भाव 👍बहुत बढ़िया.. 🤩लाजवाब 🤩बेहतरीन 🙌क्या खूब कहा 😔बहुत मार्मिक 😀वाह! वाह! क्या बात है! 🤗शानदार 👌गजब 🙏छा गये आप 👏तालियां ✌शाबाश 😍जबरदस्त
विज्ञापन
X
बेहतर अनुभव के लिए
4.3
ब्राउज़र में ही

अब मिलेगी लेटेस्ट, ट्रेंडिंग और ब्रेकिंग न्यूज
आपके व्हाट्सएप पर