इंसानियत
इंसान वही जो दर्द पराए समझ सके,
गिरते हुए को हाथ बढ़ाकर थाम सके।
नफरत की आग में प्रेम के दीप जलाइए,
रूठे हुए दिलों को प्यार से मनाइए।
न दौलत बड़ी है, न ऊँचा कोई मकाम,
इंसानियत से ही रोशन होता है नाम।
भूखे को रोटी और प्यासे को पानी दीजिए,
बदले में कुछ न चाहें, बस खुशियाँ बाँटिए।
मंदिर-मस्जिद से पहले दिल को साफ रखिए,
इंसान बनकर इंसानियत का मान रखिए।
--ऋतंधरा मिश्रा
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