आप अपनी कविता सिर्फ अमर उजाला एप के माध्यम से ही भेज सकते हैं

बेहतर अनुभव के लिए एप का उपयोग करें

विज्ञापन

नवदीप ; एक नया दीपक

                
                                                         
                            गगन मगन हो डोल रहा,
                                                                 
                            
खग गुंजन कर बोल रहा,
पुष्प कली बिनु धूप खिली,
कोयल को नव गीत मिली,
जैसे नृत्य समीर करें,
ताल मिलाता नीर बहे,
भौं पुष्प छोड़ निकल,
चौपायों में भी हलचल,
बड़ी विकल हूई मत्सय कुमारी,
सुन्दर किसकी यह किलकारी,
जिसका करें सभी बखान,
कमल नयन मुख चन्द्र समान,
खिली मुस्कान मयूरी गला,
रंग उज्जवल जैसे कोई हंस मिला,
नव भुज तेज दमक रहा,
सूर्य किरण पा चमक रहा,
हर्षित माही जो पग स्पर्श मिला,
पुष्प खिला नवदीप जला,
तन शीतल जैसे मलय पवन,
नव राग उठा स्वर नूतन।
- हमें विश्वास है कि हमारे पाठक स्वरचित रचनाएं ही इस कॉलम के तहत प्रकाशित होने के लिए भेजते हैं। हमारे इस सम्मानित पाठक का भी दावा है कि यह रचना स्वरचित है। आपकी रचनात्मकता को अमर उजाला काव्य देगा नया मुक़ाम, रचना भेजने के लिए यहां क्लिक करे। 
4 वर्ष पहले

कमेंट

कमेंट X

😊अति सुंदर 😎बहुत खूब 👌अति उत्तम भाव 👍बहुत बढ़िया.. 🤩लाजवाब 🤩बेहतरीन 🙌क्या खूब कहा 😔बहुत मार्मिक 😀वाह! वाह! क्या बात है! 🤗शानदार 👌गजब 🙏छा गये आप 👏तालियां ✌शाबाश 😍जबरदस्त
विज्ञापन
X
बेहतर अनुभव के लिए
4.3
ब्राउज़र में ही

अब मिलेगी लेटेस्ट, ट्रेंडिंग और ब्रेकिंग न्यूज
आपके व्हाट्सएप पर