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जिन धड़क में तुम नहीं

                
                                                         
                            नैन के थिरकने से जान लो, मैं बुलाता हूँ तुम्हें,
                                                                 
                            
डोरी लगाके ख़्वाब में खींच लाता हूँ तुम्हें,
तुम सुबह की हो सुकूं पहली खिली,
अंगड़ाइयों में जो मुझे हर दिन मिली,
सुन लो टेक ले हर धड़कनों में गूंजता नाम है,
जिन धड़क में तुम नहीं, वे धड़कनें निष्काम हैं।

ये फूल होंठों पर खिले, ये शरगोशियां ताज़गी की,
तुम चुराती हो नज़र या ये अदा है नाराजगी की?
धूप की पा रौशनी से एक सुनहरापन,
जुल्फ को छूकर फिजाएं, कीमती कहती इसे वन,
मैं जीत लूँ दिल तुम्हारा, जितना चाहें इस प्रीत का दाम है,
जिन धड़क में तुम नहीं, वे धड़कनें निष्काम हैं।

– ऋषभ भट्ट
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7 महीने पहले

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