एक अजनबी दिल का इस ख्वाब ले गई,
अदाओं के बदले चैन बेहिसाब ले गई।
आंखों पे इन मैं पहेरा लिख लाया,
कोरे कागज़ पे उसका चहेरा लिख लाया,
कोई देखे तो बताना,
हाय! उसका सताना,
यूं लगता है फ़लको से मेरे आफ़ताब ले गई,
एक अजनबी दिल का इस ख्वाब ले गई,
अदाओं के बदले चैन बेहिसाब ले गई।
परवाह मुझे उसकी, मेरा दिल मासूम है,
छेड़ न दे उसको वो इतनी मरहूम है,
छू उसको ये फिजाएं,
काट दें सब बलाएं,
मुझको वो देके एक खटक दिल के सारे रुआब ले गई,
एक अजनबी दिल का इस ख्वाब ले गई,
अदाओं के बदले चैन बेहिसाब ले गई।
रोज आती है ख्यालों में बात कुछ ज्यादा है,
मुझे लगता है उसका भी कुछ करने का इरादा है,
अल्फ़ाज़ सारे सुन सकूं मैं,
खामोश उसकी गुफ्तगू मैं,
धड़कनों को छीन मुझसे जो बेताब ले गई,
एक अजनबी दिल का इस ख्वाब ले गई,
अदाओं के बदले चैन बेहिसाब ले गई।
तलब में जोड़ पन्ना तलाश में मुकाम की,
भर गई थी सब सुराही उसके आने से शाम की,
शरबतों में जिक्र उसका,
स्वाद उसके, फिक्र उसका,
होंठों को चखा वो हुस्न से भरी शराब ले गई,
एक अजनबी दिल का इस ख्वाब ले गई,
अदाओं के बदले चैन बेहिसाब ले गई।
– ऋषभ भट्ट
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