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और असफलता से इतनी नफ़रत काहे को?

                
                                                         
                            ना ठुकरा इन आँसुओं को,
                                                                 
                            
ये भी तेरे ही हिस्से हैं।
ग़म भी तेरा, आँसू भी तेरे,
फिर इनसे भागना काहे को?

जैसे ख़ुशी तेरी, सफलता तेरी,
वैसे ही दुःख और निराशा भी तेरी।
फिर सफलता से इतना प्यार,
और असफलता से इतनी नफ़रत काहे को?

जो तेरे मन का हो,
उसे अपना कहता है,
न मन का हो , उसे पराया क्यों?
हर रंग को जीना है अगर,
तो सिर्फ़ उजालों का सहारा काहे को?

आँसू आएँ तो आने दे,
उन्हें भी कुछ कहने दे।
दर्द आए तो आने दे,
उन्हें भी कुछ समझने दे।
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32 मिनट पहले

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