अखबार
किसी
रेल यात्रा पर
सबको
अपनी मोबाइल में
खोये देखकर
पुराने दिन
याद आ गए
जब एक रूपए का
अखबार किसी ने
खरीद लिया वह
पूरी यात्रा भर
सबको जोड़ने
और बतियाने का
एक अच्छा जरिया
बन जाता था
सब अलग - अलग
पन्ने को
बांटकर पढ़ते
फिर सब जोड़ देते
और इसी बहाने
खुद भी अनजानों से
जुड़ जाते
काश उन पन्नों
की दुनिया में
फिर लौट पाते ।
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