मेरे बस में हो तो हवाओं को भी इजाज़त न दूँ,
तेरी ख़ुशबू चुरा ले जाएँ, इतनी रियायत न दूँ।
लिख दूँ तेरा नाम अपनी एहसासों की दीवार पर,
फिर किसी धड़कन को उसे मिटाने की इजाज़त न दूँ।
समंदर की हर लहर से तेरा पता पूछता रहूँ,
तेरी यादों के किनारे उम्र भर लिखता रहूँ।
कोई आकर मेरे ख़्वाबों पर अपना हक़ न जताए,
मैं तेरे नाम की दुनिया में तेरा ही बनकर रहूँ।
तुझे चाहूँ तो चाहूँ इस क़दर, कोई मिसाल न रहे,
मेरे इश्क़ के आगे कोई दूसरा सवाल न रहे।
तेरे नाम को लिख दूँ अपनी रूह की तहरीर में,
वक़्त गुज़र जाए मगर उस पर गर्द-ए-मलाल न रहे।
तू मेरी चाहतों का आख़िरी मुक़ाम बन जाए,
मेरी हर सुबह और हर शाम तेरे नाम बन जाए।
मैं तुझे क़ैद नहीं करूँगा अपनी मोहब्बत में,
बस इतना हो कि तेरा दिल मेरा हमनाम बन जाए।
तेरी आज़ादी भी महफ़ूज़ रहे, मेरा इश्क़ भी आबाद रहे,
तेरे लबों पर हँसी रहे, दिल में मेरा ख़याल रहे।
नाम लिखना तो आसान है साहिल की रेत पर,मरहबा !
मैं वो उलफ़त लिखूँ जो हर तूफ़ान के बाद भी बरक़रार रहे।
-रतन कुमार कैथवास
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