इनकी आँखों में देखे कोई,
स्याह समंदर की रवानी हो जैसे,
डूब जाए जो एक बार इनमें,
फिर निकलना भी कहानी हो जैसे।
इनकी पलकों की छाँव में ठहरूँ,
शाम कोई सुहानी हो जैसे,
लब खामोश रहें फिर भी लगता है,
हर नज़र एक जुबानी हो जैसे।
इनकी आँखों में रात उतरती है,
चाँदनी भी पुरानी हो जैसे,
जिसने देखा है इनको इक पल,
उसकी दुनिया दीवानी हो जैसे।
-रतन कुमार कैथवास
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