अब लहरों से ही पूछ अपनी मंज़िल का पता,
जिसे डर था सफ़र का, वो मुसाफ़िर तो गया।
कौन कहता है कि तूफ़ान मिटा देता है राह,
जिसने लड़ना नहीं छोड़ा, वो मुक़द्दर तो गया।
डूबना भी अगर सीख ले कोई समंदर में,
फिर उसे रोक सके ऐसा कोई साहिल तो गया।
तूने लहरों को चुनौती जो समझकर दी है,
अब तेरे सामने डरने का हर मंज़र तो गया।
जिसने ख़ुद अपने इरादों को बनाया पतवार,
उसके हिस्से में कहाँ कोई भी पत्थर तो गया।
-रतन कुमार कैथवास
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