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वक़्त ने लाख कहा, भूल जा उस शख़्स को अब

                
                                                         
                            तेरी ख़ुशबू-सी लगी, ये शाम की ठंडी आहट,
                                                                 
                            
हर झोंके ने मुझे, फिर से तेरा एहसास दिया।

चाँद निकला तो, तेरी आँख का ख़याल आया,
रात ने चुपके से, फिर दिल को बहुत उदास किया।

बादलों ने जो, कहीं दूर गरजकर देखा,
हमने समझा कि, तूने फिर कोई पैग़ाम दिया।

सूनी राहों में, तेरे पाँव की आहट ढूँढी,
हर क़दम ने, तेरी यादों का ही आग़ाज़ किया।

वक़्त ने लाख कहा, भूल जा उस शख़्स को अब,
दिल ने हर बार, मगर तेरा ही नाम लिया।

जब भी पुरवैया चले, तो यही लगता है मुझे,
किसी ने दूर कहीं, प्यार से मुझे याद किया।
-रतन कुमार कैथवास
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1 hour ago

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