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कोई जिगर तलाश कर

                
                                                         
                            हर मोड़ पर यूँ बैठ के शिकवा न कर ज़माने से,
                                                                 
                            
कुछ अपने लिए भी कोई हुनर तलाश कर।

तूफ़ान अगर मिले तो सफ़र छोड़ मत कभी,
लहरों के बीच अपना कोई साहिल तलाश कर।
मंज़िल मिले न मिले, ये तेरा इख़्तियार है,
चलते हुए क़दमों में नया असर तलाश कर।

जो आज हाथ खाली हैं, कल भर भी जाएँगे,
बस अपने इरादों में नया दम तलाश कर।
किस्मत भी एक दिन तेरे दर पर झुकेगी,
पहले तू अपने भीतर कोई जिगर तलाश कर।
-रतन कुमार कैथवास
- हम उम्मीद करते हैं कि यह पाठक की स्वरचित रचना है। अपनी रचना भेजने के लिए यहां क्लिक करें।
44 minutes ago

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