राहों में अगर काँटे हैं, काँटों से गुज़र जाएँ,
मंज़िल को पा लेना ही इस दिल की निशानी है।
तूफ़ान से कह दो कि हमें रोक नहीं सकता,
सीने में अभी ज़िंदा एक आग पुरानी है।
जो लोग हमें रोकें, वो रोकते ही रह जाएँ,
हमने तो समंदर में भी राह अपनी बनानी है।
गिरकर भी सँभलना है, थककर भी चलना है,
हर चोट के सीने में इक नई कहानी है।
मिट्टी में दबा देंगे तो फिर खिलकर फूल बनेंगे हम,
ये हार नहीं 'रतन', बस वक़्त की रवानी है।
दरिया की तरह अपना सफ़र जारी ही रहेगा,
रास्ता न मिले तो ख़ुद राह बनानी है।
-रतन कुमार कैथवास
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