निहाल मैं हो गया, तेरे आने की खबर पाकर,
मगर दिल को तसल्ली नहीं, तुझे सामने नज़र पाकर।
कहा सबने कि तू आएगा, यक़ीं फिर भी नहीं होता,
ये कैसी बेकसी है कि दिल अब भी नहीं सोता।
तेरी आहट की उम्मीदें दर-ओ-दीवार सजाती हैं,
मगर आँखें तुझे देखे बिना कैसे यक़ीं पाती हैं।
ख़बर तेरी मिली तो साँस में जैसे बहार आई,
मगर तेरी सूरत न दिखी तो फिर भी दिल ने बात न मानी।
कहते हैं लोग, आने वाला है वो मेरे शहर में,
मैं कैसे मान लूँ, जब तक तू न दिखे मेरी नज़र में।
तेरे आने की ख़ुशी में दिल ने सौ दीप जलाए हैं,
मगर यक़ीं के रास्ते पर तेरे कदम अभी नहीं आए हैं।
ये कैसी चाहत है, ये कैसी बेकरारी है,
खबर तो है तेरी, मगर आँखों को तेरा इंतज़ार अभी भी जारी है।
-रतन कुमार कैथवास
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