सलोने दिन, सलोनी चाँदनी रातें,
तेरी यादों में गुज़रती हैं मुलाक़ातें।
बिखरकर जब महकती है बेला की ख़ुशबू,
तेरी आँखों में उतर आती हैं बरसातें।
नज़र भरकर ज़रा देखूँ तेरी आरज़ू,
मेरे ख़्वाबों से सजी रहती हैं तेरी बातें।
हवाओं में तेरे गेसूओं की रवानी है,
फ़िज़ाओं में उलफ़त की कहानी है।
तेरी पलकों पे ठहरी ओस की बूँदें,
जैसे चाँदनी ने लिखी कोई निशानी है।
तुझे देखूँ तो ठहर जाए ये दिल मेरा,
तेरी सूरत में कोई दुनिया सुहानी है।
तेरे आने से, बहारों का निखरना देखा,
सूनी राहों को भी, फूलों से सँवरना देखा।
तेरी आहट ने, जगाए दिल में अरमाँ ऐसे,
बुझते दीपों को, अचानक फिर से जलना देखा।
तेरी नज़रों में, जो इक बार पनाह मिल जाए,
फिर कहाँ, हमने ज़माने से सँभलना देखा।
चाँद निकले तो तेरा चेहरा नज़र आता है,
हर सितारा तेरी बातों का पता लाता है।
बेला महके तो तेरा ज़िक्र चला आता है,
दिल तेरी याद में ख़ामोश हुआ जाता है।
तू मिले या न मिले, फ़र्क़ नहीं पड़ता,
तेरा एहसास भी जीने का सबब लाता है।
सलोनी रात, तेरी याद का उजाला रहे,
मेरे लब पर तेरा नाम ही निराला रहे।
नज़र भरकर तुझे देखूँ, यही आरज़ू है,
तेरी आँखों में मोहब्बत का हवाला रहे।
बेला महके, चाँद चमके, हवा गुनगुनाए,
मेरे दिल में तेरी उलफ़त का सवेरा रहे।
-रतन कुमार कैथवास
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