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अब तुम आ भी जाओ

                
                                                         
                            सितारों के आँगन में पानी का छींटा पड़ा,
                                                                 
                            
मैं घबराकर उठा तो ख़्वाब निकला।

ना जाने कैसे-कैसे ख़्वाब आने लगे हैं,
तेरे बिना ये दिन भी अजीब जाने लगे हैं।

कभी चाँद उतरता है मेरी खिड़की पर,
कभी बादल तेरे ख़त लाने लगे हैं।

नींद आती नहीं, रात सँवरती नहीं,
ये ख़्वाब भी अब मुझे सताने लगे हैं।

अब तुम आ भी जाओ, कुछ तो सुकून हो,
तुम बिन घर के कोने भी बिखरने लगे हैं।

कितना सँभालूँ इस अस्त-व्यस्त दिल को,
तुम आओ तो शायद हम फिर सँवरने लगे हैं।
-रतन कुमार कैथवास
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एक घंटा पहले

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