आप अपनी कविता सिर्फ अमर उजाला एप के माध्यम से ही भेज सकते हैं

बेहतर अनुभव के लिए एप का उपयोग करें

विज्ञापन

आँखों में उतर जाना चाहता हूँ

                
                                                         
                            बहुत अरसा हुआ तेरी ख़बर लिए हुए,
                                                                 
                            
अब मैं तेरी ख़बर बन जाना चाहता हूँ।

हर दफ़ा मैंने ही तेरा नाम लिया है,
अब तेरे होंठों पे अपना नाम चाहता हूँ।

तेरी राहों में बिछाए हैं बहुत ख़्वाब मैंने,
अब तेरे ख़्वाबों में भी आना चाहता हूँ।

तूने पूछा ही नहीं हाल कभी मेरा,
अब तेरी आँखों में उतर जाना चाहता हूँ।

मैंने हर दर्द को चुपचाप सहा है तेरे लिए,
अब तेरा हाथ मुझे थामे, यही चाहता हूँ।

उम्र भर तुझको पुकारा है उलफ़त से 'स्नेह',
अब इकरार में तुझे अपना पता देना चाहता हूँ।
-रतन कुमार कैथवास
- हम उम्मीद करते हैं कि यह पाठक की स्वरचित रचना है। अपनी रचना भेजने के लिए यहां क्लिक करें।
एक घंटा पहले

कमेंट

कमेंट X

😊अति सुंदर 😎बहुत खूब 👌अति उत्तम भाव 👍बहुत बढ़िया.. 🤩लाजवाब 🤩बेहतरीन 🙌क्या खूब कहा 😔बहुत मार्मिक 😀वाह! वाह! क्या बात है! 🤗शानदार 👌गजब 🙏छा गये आप 👏तालियां ✌शाबाश 😍जबरदस्त
विज्ञापन
X
बेहतर अनुभव के लिए
4.3
ब्राउज़र में ही

अब मिलेगी लेटेस्ट, ट्रेंडिंग और ब्रेकिंग न्यूज
आपके व्हाट्सएप पर