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हवा भी रुक गई है तेरे इंतज़ार में अब

                
                                                         
                            तेरे क़दमों की आहट से सहर जाग उठे,
                                                                 
                            
तेरी एक मुस्कान से मौसम गुलज़ार हो चले।

बहुत उदास था ये शहर तेरे बिन अब तक,
तुम आओ तो हर गली में फिर से कुछ हुल्लड़ चले।

जो सूखे बैठे हैं आँखों में ख़्वाबों के चमन,
तेरी नज़र पड़े तो फिर से बहार चले।

हवा भी रुक गई है तेरे इंतज़ार में अब,
तुम आओ तो ज़रा उसका भी इक़रार चले।

हमारी रात बहुत लंबी हो गई है दोस्त,
तुम आओ तो चाँदनी का भी कारोबार चले।

तेरे बिना तो ये दिल भी वीराना सा है,
तुम आओ तो ज़िंदगी फिर से बेशुमार चले।
-रतन कुमार कैथवास
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1 hour ago

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