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आँखों का काजल कुछ कह रहा है

                
                                                         
                            बेशकीमती पनाहगाह को क्यों ठुकरा दिया,
                                                                 
                            
तेरी आँखों का काजल शायद कुछ कह रहा है।

लब ख़ामोश हैं फिर भी कहानी बोलती है,
तेरी पलकों का झुकना कोई राज़ कह रहा है।

किस बात की है हिज़्र की ये लंबी रातें,
तेरा काजल भी मुझसे कुछ सवाल कर रहा है।

तू कहती नहीं, मगर आँखें छुपाती भी नहीं,
तेरे चेहरे का हर रंग तेरा हाल कह रहा है।

मैं समझूँ इसे इकरार या कोई इशारा,
तेरा ख़ामोश काजल जाने क्या-क्या कह रहा है।
-रतन कुमार कैथवास
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1 hour ago

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