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उम्र भर याद रहा उस बूँद का लगना पानी।

                
                                                         
                            तेरी ज़ुल्फ़ों से जो टपका तो नज़ारा बदला,
                                                                 
                            
बूँद-बूँद से लगा जैसे हो कोई अफ़साना पानी।

तेरी आहट से ही मौसम में रवानी आई,
सूखे पत्तों ने भी सीखा है मचलना पानी।

बादलों ने तेरी यादों का बहाना ढूँढा,
आँख भर आई तो फिर आँख से बरसा पानी।

तू जो छत पर कभी आई तो ये दिल कहने लगा,
आज बादल नहीं, शायद है तेरा आना पानी।

एक बूँद तेरे होंठों से जो छूकर निकली,
उम्र भर याद रहा उस बूँद का लगना पानी।

बारिशें यूँ तो बहुत देखी हैं हमने 'रतन',
तेरे आने से मगर और भी लगता प्यारा पानी।
-रतन कुमार कैथवास
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1 hour ago

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