आप अपनी कविता सिर्फ अमर उजाला एप के माध्यम से ही भेज सकते हैं

बेहतर अनुभव के लिए एप का उपयोग करें

विज्ञापन

कौन कहता है, मै तुझे याद नहीं करती

                
                                                         
                            कौन कहता है,मै तुझे याद नही करती।
                                                                 
                            
भरती हूं जब मांग,बस तुझे ही याद करती।

कौन कहता है,मै तुझे प्यार नही करती।
संध्या होते ही,तेरे लिए अपने को तैयार करती।।

कौन कहता है,मै तेरा इंतजार नही करती।
होती है जब कोई आहट,द्वार मै ही खोलती।।

कौन कहता है,मै तेरे लिए बेचैन नही रहती।
जब तक घर न आ जाओ,चैन नही मिलती।।

कौन कहता है,मै तेरे लिए नही सजती संवरती।
बता देगा आयना,मै तेरे लिए ही सजती संवरती।।
-आर के रस्तोगी
- हम उम्मीद करते हैं कि यह पाठक की स्वरचित रचना है। अपनी रचना भेजने के लिए यहां क्लिक करें।
एक घंटा पहले

कमेंट

कमेंट X

😊अति सुंदर 😎बहुत खूब 👌अति उत्तम भाव 👍बहुत बढ़िया.. 🤩लाजवाब 🤩बेहतरीन 🙌क्या खूब कहा 😔बहुत मार्मिक 😀वाह! वाह! क्या बात है! 🤗शानदार 👌गजब 🙏छा गये आप 👏तालियां ✌शाबाश 😍जबरदस्त
विज्ञापन
X
बेहतर अनुभव के लिए
4.3
ब्राउज़र में ही

अब मिलेगी लेटेस्ट, ट्रेंडिंग और ब्रेकिंग न्यूज
आपके व्हाट्सएप पर