कौन कहता है,मै तुझे याद नही करती।
भरती हूं जब मांग,बस तुझे ही याद करती।
कौन कहता है,मै तुझे प्यार नही करती।
संध्या होते ही,तेरे लिए अपने को तैयार करती।।
कौन कहता है,मै तेरा इंतजार नही करती।
होती है जब कोई आहट,द्वार मै ही खोलती।।
कौन कहता है,मै तेरे लिए बेचैन नही रहती।
जब तक घर न आ जाओ,चैन नही मिलती।।
कौन कहता है,मै तेरे लिए नही सजती संवरती।
बता देगा आयना,मै तेरे लिए ही सजती संवरती।।
-आर के रस्तोगी
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