सचमुच देखा मैंने इस इश्क में होते हुए कईयों को बर्बाद जी,
देखा मैंने इसी इश्क में होते हुए भी कईयों को आबाद जी,
देखा कईयों को इस इश्क को बरबस भूलने की कोशिश करते हुए भी,
और देखा कईयों को इसमें भूले को करते हुए जबरन फिर से याद जी|
-मनस्व
- हम उम्मीद करते हैं कि यह पाठक की स्वरचित रचना है। अपनी रचना भेजने के लिए यहां क्लिक करें।
कमेंट
कमेंट X