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बिल्कुल जीवन की ही भांति

                
                                                         
                            उतार कर अपने ही हाथों अपने गले का हार दिया जा सकता है,
                                                                 
                            
हो कर बिल्कुल निडर मौत से भी आंखें चार किया जा सकता है,
सचमुच अगर हृदय में हो जीवन की सच्ची प्यास सच्ची तृष्णा तो,
बेशक बिल्कुल जीवन की ही भांति मौत पर भी विचार किया जा सकता है|
-मनस्व
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एक घंटा पहले

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