बांहों के हार शांतरस में
आया शृंगार शांतरस में |
पकवान समझकर नारी को
टपके है लार शांतरस में |
रस का व्यापार शांतरस में
धन का भण्डार शांतरस में |
इत श्याम-श्याम राधे-राधे
उत चीख-पुकार शांतरस में |
नित क्रोध अपार शांतरस में
मारक हथियार शांतरस में |
कैसा है ये वैराग्य अजब
सत्ता-विस्तार शांतरस में |
-रमेशराज
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