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रसोइया पर कविता

                
                                                         
                            स्कूल की रसोइयां
                                                                 
                            

राह देखते हैं बच्चे
जिनके आने की
आस लगाए बैठे रहते
भोजन बन जाने की,
प्यार परोसा जाता तेरा
हर थाली में
फिर मिटती है क्षुधा तेरे ही
रखवाली में
कौन कहेगा? तेरे वेतन से
घर चलता है
सच तो है कि -
प्यार से तेरे उन बच्चों का
मन भरता है
सच पूछो तो,
स्कूलों की क ख ग हो
भूखे प्यासे उन बच्चों की
सच्ची मां हो।
भूखे प्यासे उन बच्चों की
सच्ची मां हो,
सच्ची मां हो।
-रामवृक्ष बहादुरपुरी
 
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5 घंटे पहले

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