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माँ की लोरी

                
                                                         
                            थक गया है मन तेरा, अब तू आराम कर,
                                                                 
                            
छोड़ दे चिंता को, मन में आँचल मेरा भर

धूप बहुत देख ली है तूने, अब छाँव मेरी ले,
सिसकियाँ रोक मत, बह जाने दे इनको ।

मैं तेरे माथे पे अब, सुकून की बात रखूँ,
बंद कर आँखें अपनी, मैं तेरे पास रहूँ

ना सोच कल, ना सोच दर्द,
आज बस तू चैन से सो जा…
मैं हूँ ना
तेरी सदा-सदा, मन में विश्वास रख
- रमा पूर्णिमा शर्मा
- हम उम्मीद करते हैं कि यह पाठक की स्वरचित रचना है। अपनी रचना भेजने के लिए यहां क्लिक करें।
9 महीने पहले

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