देवी की आठवां स्वरूप मां महागौरी कहलाता है।
नवरात्रि के आठवें दिन इनको ही पूजा जाता है।।
मां ने बध कर राक्षसों का गंगा में स्नान किया।
मिटी थकान धुली है काया तन गौरवर्ण समान हुआ।।
वृषभ आरूढ़ श्वेतवस्त्र धारी श्वेताम्बरा बन पाईं।
चार भुजा धारी तन गौर वर्ण महागौरी कहलाईं।।
एक हाथ में लिया है डमरू दूजे में लिया त्रिऋूल।
तीसरा है वरदहस्त चौथे से मां करतीं भय निर्मूल।।
माता हैं अमोघ फलदायिनी भक्तों का करें कल्याण ।
मां की पूजा से मिलती शान्ति व सुख समृद्धि की खान।।
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