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यह जो नफरत का अलाव सुलग रहा है

                
                                                         
                            यहाँ हर आदमी
                                                                 
                            
एक फटे हुए लिफाफे की तरह है
जिसके भीतर
धर्म की कोई पुरानी पर्ची पड़ी है।
सड़क पर खून बह रहा है
और संसद में
कुछ लोग वोटों की गिनती का
अबेकस हिला रहे हैं।

सुनो!
यह जो भगवान के नाम पर
तुम्हारे हाथों में पत्थर थमाए गए हैं
ये तुम्हारी तकदीर के नहीं,
तुम्हारे ही घरों के चिराग बुझाने के औजार हैं।

रोटी की बात करो,
दवा की बात करो,
रोजगार के फटे हुए आसमान को
सिलने की बात करो—

यह जो नफरत का अलाव सुलग रहा है
इसमें सबसे पहले
तुम्हारा ही घर, तुम्हारी ही चूल्हें की आग
और तुम्हारी ही राख बचेगी।
 
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43 minutes ago

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