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झूमें हैं मुस्कुराये हैं उल्फत की टोलियां

                
                                                         
                            उमड़ी ह्रदय में प्यार की खुशियां हज़ारहां
                                                                 
                            
आये ख़याल सजन का, मन में है बारहां

उड़ने लगी हैं झूमती, फूलों पे तितलियां
हर ओर इक बहार है देखूं जहां जहां

गुलशन में भी बहार है, गुलनार खिल रहे
सूना मिरा जहान है, ढूंढूं तुझे कहां

मन से ह्रदय से रूह तक, इक रोशनी जगे
सब प्रीत, मीत, बंदगी, मुझमें ही है निहां

झूमें हैं मुस्कुराये हैं उल्फत की टोलियां
खिलते हैं फूल प्यार के, 'नुदरत' यहां वहां
- राकेश मल्होत्रा नुदरत 
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एक घंटा पहले

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