उत्सव है प्रत्येक पल यदि है संतुष्ट
वर्तमान से ज़िंदगी,
कीजिये नृत्य तो कभी कीजिये
भजन और बंदगी,
सम्मान दें इस उपहार को जैसे
भाग्य का प्रसाद हो,
किंतु सजग रहिये प्रत्येक पल सदा
कि न हो अवमानना अधिकार की.
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