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स्वार्थी मौन

                
                                                         
                            समय शेष है,नहीं पाप का भागी केवल व्याध,
                                                                 
                            
जो तटस्थ हैं,समय लिखेगा उनके भी अपराध।

प्रेम रुपी मौन से जग जीता जाता है,
कभी कभी मौन भी व्यथित कर जाता है,
स्वार्थ के बंधन में ज़ब मौन बंध जाता है,
भीष्म के मौन सा एक अभिशाप बन जाता है,
धर्म विरुद्ध तटस्थ रहना भी एक कायरता होती है,
जीवन के कुरुक्षेत्र में पराजय के बीज बोती है,
एक शक्तिशाली क्यों शक्तिविहीन हो जाता है?
स्वार्थ और कायरता का विष घोल जाता है,
ज़ब पानीपत हो जाता है रक्त से लथपथ,
यही पराजय लिखती है दासता का इतिहास,
इतिहास क्षमा नहीं करता है मौन रुपी अपराध,
धर्म के पक्ष में रहना सदा न्याय होता है,
तटस्थ होकर बलराम इतिहास नहीं बनाते हैँ,
धर्म के लिए प्रभु गीता सन्देश दे जाते हैँ |
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एक घंटा पहले

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