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ज़ब टूट चुका अंतर्मन

                
                                                         
                            ज़ब जीवन में मिलती है पराजय,
                                                                 
                            
असफलता का द्वार खुल जाता है,
निंदा से ही मानव मन टूट जाता है,
यूँ ही समय हाथ से निकल जाता है,
जीवन की दोपहर यूँ ही बीत जाती है,
कठिन डगर पर चलते चलते,
ज़ब सफलता का द्वार दिखायी देता है,
अमावस सा अंधेरा छा जाता है,
ज़ब टूट चुका अंतर्मन,
सफलता का स्वाद फीका हो जाता है,
जीवन तो बहती सरिता है,
सागर में मिल जाना है,
यात्री को निरंतर बढ़ना होता है,
रंगहीन सफलता भी तिनके सा सहारा है,
संघर्ष करने वाला कभी न हारा है |
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एक घंटा पहले

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