मैं ख़तावार हूं बता ना सका
जो छुपा था वो दिल में जता ना सका
तेरे सामने भी मैं चुप ही रहा
हाल ए दिल अपना सुना ना सका
तू समझती रही शायद बेगाना मुझे
अपना तुझ को मैं बना न सका
मेरी आँखों में थे अश्क़ काफ़ी मगर
कोई अश्क़ आँख से नीचे आ न सका
तुम जिस मोड़ पर गई मुझे छोड़कर
मैं उस मोड़ पर फिर खुद को ला न सका
वो साथ मेरा निभा ना सका
मैं भी रिश्ता वो भुला ना सका
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