तूफ़ानों में भी जलता दिया
दुश्मनों को भी यही खल रहा है,
कि तूफ़ानों में भी हमारा दिया क्यों जल रहा है।
हवाओं ने पूरी ताकत लगा दी बुझाने में,
अँधेरों ने भी कोई कसर नहीं छोड़ी डराने में,
मगर ये कैसी ज़िद है इस रोशनी की,
जो हर झोंके के बाद और प्रबल हो रहा है।
जिन्होंने सोचा था अब सब खत्म हो जाएगा,
उनके सामने ही उजाला फिर मुस्कुराएगा।
हम टूटे जरूर हैं, मगर बिखरे नहीं,
इसीलिए हमारा हौसला अब भी पल रहा है।
दुश्मनों को भी यही खल रहा है,
कि तूफ़ानों में भी हमारा दिया क्यों जल रहा है।
-रजनी
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