सफ़र का मज़ा लो
सफ़र हसीन होते हैं,
मंज़िलों पर अक्सर
सिर्फ़ तन्हाई मिलती है।
रास्तों में जो पल मिले,
उन्हें खुलकर जी लिया करो,
हर मोड़ की कहानी को
दिल से पढ़ लिया करो।
मंज़िल मिल भी जाए तो
सफ़र खत्म हो जाता है,
जो रोमांच रास्तों में है,
वो कहाँ मंज़िल में रह पाता है।
इसलिए मंज़िल की चिंता छोड़ो,
हर कदम का मज़ा लो,
ज़िंदगी एक सफ़र है,
इसे सफ़र की तरह जियो—
मंज़िल का नहीं, सफ़र का मज़ा लो।
-रजनी
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