नज़रों से गिरने के बाद
मेरी नज़रों से गिरने के बाद,
तुम फ़लक का चाँद बनो
या आसमान का सितारा,
मुझे कोई फ़र्क नहीं पड़ता।
कभी तुम्हारी चमक
मेरी आँखों में थी,
मगर जब विश्वास ही टूट गया,
तो रोशनी भी फीकी पड़ गई।
अब तुम्हारी ऊँचाई नहीं देखती मैं,
बस इतना जानती हूँ—
जो दिल से उतर जाए,
वो दुनिया की नज़रों में
कितना भी ऊँचा क्यों न हो,
मेरे लिए फिर कुछ नहीं।
-रजनी
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