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मुझे मैं पसंद हूँ

                
                                                         
                            मुझे मैं पसंद हूँ
                                                                 
                            

मुझे मैं पसंद हूँ,
यही मेरी ज़िंदगी का जश्न है,
मैं कैसी हूँ, क्या हूँ—
इसका फैसला मेरा अपना है।

मैं किसी को पसंद आऊँ
या न आऊँ,
यह उनका प्रश्न है,
हर किसी की पसंद बनना
मेरी ज़िंदगी का उद्देश्य नहीं है।

मैंने खुद को समझा है,
अपने आँसुओं से सँवारा है,
गिरकर भी उठना सीखा है,
और खुद को फिर से निखारा है।

दुनिया चाहे जो कहे,
अब मुझे फर्क नहीं पड़ता,
क्योंकि अपनी नज़रों में
खरा उतरना ही
मेरे लिए सबसे बड़ा जश्न है।

मुझे मैं पसंद हूँ—
और यही मेरी सबसे खूबसूरत पहचान है।
— रजनी
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48 minutes ago

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