मायके क्यों जाना है
जब पति-पत्नी में लड़ाई होती है,
पत्नी अक्सर गुस्से में
मायके चली जाती है।
मगर मेरा मानना है—
जिसने मुझे सताया है,
उसी को सताना है,
जिसने दिल दुखाया है,
उसी से अपना हिसाब चुकाना है।
मायका मेरा अपना है,
मगर हर नाराज़गी में
वहाँ जाकर बैठ जाना नहीं।
आज तक मैं भी
लड़कर मायके नहीं गई,
क्योंकि मेरा मानना है—
रिश्ता मेरा है,
तो रूठना भी मेरा है,
मनाना भी मेरा है।
जिसके साथ जिंदगी बितानी है,
उसी के साथ
रिश्ते की उलझन सुलझानी है,
हर लड़ाई में
मायके की चौखट क्यों अपनानी है?
-रजनी
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