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एक नमूने से पूरा ब्रह्मांड नहीं

                
                                                         
                            एक नमूने से पूरा ब्रह्मांड नहीं
                                                                 
                            

कुछ ऐसे भी मूर्ख होते हैं,
जो एक छोटे-से नमूने से
पूरे ब्रह्मांड की राय बना लेते हैं,
एक अनुभव को ही
संपूर्ण सत्य मान लेते हैं।

एक इंसान धोखेबाज़ निकला,
तो कहते हैं—सब ऐसे ही हैं,
एक रिश्ता टूट गया,
तो कहते हैं—हर रिश्ता झूठा है।

एक नारी गलत निकली,
तो पूरी नारी जाति पर
कलंक लगाने लगते हैं,
जैसे एक बूंद की गंदगी से
पूरा समुद्र गंदा हो जाता है।

अरे मूर्खों!
नमूना छोटा हो तो
निष्कर्ष भी छोटा रखो,
एक कहानी के आधार पर
पूरी किताब को मत परखो।

क्योंकि ब्रह्मांड बहुत बड़ा है,
और तुम्हारा अनुभव
सिर्फ उसका एक छोटा-सा पन्ना है।

— रजनी
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9 घंटे पहले

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