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चीनी नहीं, नमक

                
                                                         
                            चीनी नहीं, नमक
                                                                 
                            

रिश्तों में हमें चीनी बनना चाहिए,
हर बात में मिठास घोलनी चाहिए,
पर हमने बहुत देख लिया
हर किसी को खुश करने का हुनर,
अब समझ आया—
हर रिश्ते में नमक भी होना चाहिए।

चीनी की तरह घुलकर
अपना अस्तित्व मिटा देना आसान है,
मगर नमक की तरह
अपनी पहचान बचाकर
रिश्ते को स्वाद देना
सच्चा संतुलन है।

अब बहुत चीनी बन लिए,
बहुत मीठे बोल बोल लिए,
हर किसी की पसंद बनने की खातिर
खुद को ही पीछे छोड़ दिए।

अब बनना होगा नमक—
कम सही, मगर जरूरी,
जहाँ जरूरत हो वहाँ मौजूद,
और जहाँ कद्र न हो
वहाँ खुद को घोल देना जरूरी नहीं।

क्योंकि रिश्ते केवल मिठास से नहीं चलते,
कभी-कभी सच्चाई की चुटकी भी चाहिए,
और अब हमने तय किया है—
हर रिश्ते में चीनी नहीं,
जहाँ जरूरत हो, वहाँ नमक बनेंगे।
-रजनी
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2 घंटे पहले

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